Tuesday, November 6, 2012




संघर्षों में, वीरानों में अंधियारों से लड़ते रहना,
संकल्पों की मनोवृत्ति ले आतप में भी तपते रहना,
सर्द हवा, बारिश, अंगारे मिलकर भी कुछ कर ना पायें,
तुम अंगद के पाँव सरीखे अपनी धुन में रमते रहना.

© सुशील मिश्र.

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